पुस्तकालय / Aesop’s Fables

शहर का चूहा और गाँव का चूहा

इनसे जुड़ी कहानी: Aesop

पाठ योजनावर्कशीट

शहर का एक चूहा अपने चचेरे भाई से मिलने गाँव गया। गाँव का चूहा झाड़ियों की एक शांत बाड़ में रहता था। उसने मेहमान के आगे जौ और कंद-मूल का सादा खाना परोसा।

शहर के चूहे ने नाक सिकोड़ी। “तुम यह कैसे खा लेते हो?” उसने कहा। “मेरे साथ शहर चलो, मैं तुम्हें दिखाता हूँ कि ज़िंदगी किसे कहते हैं।”

तो दोनों चूहे चल पड़े। उस रात वे दबे पाँव एक बड़ी हवेली में घुसे। वहाँ एक मेज़ पनीर, केक और शहद से सजी थी। गाँव के चूहे को अपनी आँखों पर यक़ीन नहीं हुआ।

उसने खाना शुरू ही किया था कि दरवाज़ा धड़ाम से खुला। ज़ोर-ज़ोर से भौंकते हुए दो बड़े-बड़े कुत्ते अंदर घुस आए। चूहे भाग खड़े हुए और एक अँधेरे कोने में छिपकर काँपने लगे।

जब सब शांत हो गया, तो गाँव के चूहे ने अपनी पोटली उठाई।

“दावत के लिए शुक्रिया,” उसने कहा। “पर मैं अपने घर जा रहा हूँ। डर-डरकर केक और मलाई खाने से तो चैन का सादा खाना कहीं अच्छा।”

सीख
डर के पकवान से चैन की रोटी भली।

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चर्चा के प्रश्न

  1. शहर का चूहा गाँव के बारे में क्या सोचता है?
  2. दावत के बीच में क्या होता है?
  3. तुम्हें कौन-सी ज़िंदगी पसंद आएगी, और क्यों?

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दूसरी भाषा में पढ़ें

शुभ रात्रि।

कल रात: दो केकड़े।