
जंगल में एक शेर सो रहा था। तभी एक नन्हा चूहा उसकी नाक पर से दौड़ गया। शेर दहाड़ता हुआ जाग उठा और उसने चूहे को अपने भारी पंजे के नीचे दबा लिया।
“मुझे छोड़ दीजिए!” चूहा गिड़गिड़ाया। “अगर आप मेरी जान बख़्श देंगे, तो एक दिन मैं आपका यह उपकार चुका दूँगा।”
शेर हँस पड़ा। इतना छोटा-सा चूहा जंगल के राजा की क्या मदद करेगा? पर उसे यह बात मज़ेदार लगी, इसलिए उसने पंजा उठाया और चूहे को जाने दिया।
कुछ दिन बाद शेर जंगल में शिकार कर रहा था कि शिकारियों के जाल में जा फँसा। रस्सियाँ उसके चारों ओर कस गईं। वह दहाड़ा, छटपटाया, पर छूट नहीं पाया।
चूहे ने उसकी दहाड़ सुनी और दौड़ा चला आया। उसने जाल को देखा, और फिर अपने नन्हे पैने दाँतों से रस्सियाँ कुतरने लगा।
जल्दी ही एक रस्सी टूटी, फिर दूसरी, और शेर आज़ाद हो गया।
“जब मैंने कहा था कि आपका उपकार चुकाऊँगा, तब आप हँसे थे,” चूहे ने कहा। “अब आपने देख लिया कि एक चूहा भी शेर के काम आ सकता है।”
भलाई कभी बेकार नहीं जाती।
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चर्चा के प्रश्न
- शेर चूहे को क्यों छोड़ देता है?
- चूहा उसका उपकार कैसे चुकाता है?
- तुम्हें क्या लगता है, शेर पहले क्यों हँसा था?
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