
कबूतर और कौआ।
"कबूतर और कौवा" में, एक बंदी कबूतर अपने अनेक बच्चों के बारे में डींग मारता है, लेकिन एक कौवा उसे याद दिलाता है कि परिवार के आकार पर इतना गर्व करना उसके दुख को और गहरा कर देता है क्योंकि वे सभी बंदी हैं। यह मार्मिक कहानी एक अनोखी नैतिक कहानी के रूप में काम करती है, जो इस बात पर जोर देती है कि प्रचुरता अधिक संकट का कारण बन सकती है, जिससे यह एक छोटी और मधुर नैतिक कहानी बन जाती है जिसमें सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश है।


