
एक कौए को पनीर का एक टुकड़ा मिला। वह उसे मज़े से खाने के लिए उड़कर पेड़ की एक डाल पर जा बैठा।
नीचे से एक लोमड़ी गुज़र रही थी। पनीर की महक पाकर वह पेड़ के नीचे बैठ गई। उसे वह पनीर चाहिए था, और उसके पास एक तरकीब थी।
“नमस्ते, सुंदर पंछी!” उसने पुकारकर कहा। “कितने चमकीले पंख हैं आपके! कैसी चमकती आँखें! अगर आपकी आवाज़ भी आपके रूप जैसी प्यारी है, तो आप ज़रूर सारे पंछियों के राजा हैं।”
कौए ने गर्व से सिर उठाया। उससे इतनी मीठी बात पहले कभी किसी ने नहीं की थी। वह लोमड़ी को अपनी शानदार आवाज़ सुनाना चाहता था।
उसने गाने के लिए चोंच खोली। “काँव!”
नीचे गिरा पनीर, सीधा लोमड़ी के मुँह में।
“शुक्रिया,” लोमड़ी ने होंठ चाटते हुए कहा। “आवाज़ तो आपके पास है। अब बस थोड़ी-सी अक़्ल की ज़रूरत है।”
चापलूसों पर भरोसा मत करो।
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चर्चा के प्रश्न
- लोमड़ी कौए से इतनी मीठी-मीठी बातें क्यों करती है?
- कौए से क्या ग़लती होती है?
- सच्ची तारीफ़ और चापलूसी में फ़र्क कैसे पहचानें?
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