
कई हफ़्तों से बारिश नहीं हुई थी। एक कौआ प्यास से मरा जा रहा था। वह पानी की तलाश में जगह-जगह उड़ता फिरा।
आख़िर उसे एक बग़ीचे में एक ऊँचा घड़ा दिखाई दिया। वह नीचे उतरा और घड़े में झाँका। तले में थोड़ा-सा पानी था, पर उसकी चोंच वहाँ तक नहीं पहुँची।
उसने घड़े को गिराने की कोशिश की, पर घड़ा बहुत भारी था। उसने घड़े को तोड़ने की कोशिश की, पर घड़ा बहुत मज़बूत था।
कौआ बैठकर सोचने लगा। तभी उसे ज़मीन पर छोटे-छोटे कंकड़ दिखाई दिए।
उसने चोंच में एक कंकड़ उठाया और घड़े में डाल दिया। डुबुक। उसने एक और डाला। डुबुक। एक-एक करके वह कंकड़ डालता गया, और धीरे-धीरे पानी ऊपर आता गया।
आख़िर पानी इतना ऊपर आ गया कि चोंच पहुँचने लगी। कौए ने जी भरकर ठंडा पानी पिया और उड़ गया।
थोड़ी-सी सूझबूझ बड़ी मुश्किल हल कर देती है।
विज्ञापन
चर्चा के प्रश्न
- कौए ने सबसे पहले क्या किया, और उससे काम क्यों नहीं बना?
- कौए ने अपनी मुश्किल कैसे हल की?
- जब हमारा पहला उपाय काम न करे, तब हम क्या कर सकते हैं?
विज्ञापन
दूसरी भाषा में पढ़ें
- The Crow and the Pitcher · English
- The Crow and the Pitcher · English
- El Cuervo y la Jarra · Español
- La Corneille et la Cruche · Français
- Die Krähe und der Krug · Deutsch
- La Cornacchia e la Brocca · Italiano
- O Corvo e o Jarro · Português
- Ang Uwak at ang Banga · Tagalog
- Ворона и кувшин · Русский
- Ворона і глек · Українська
- దాహం వేసిన కాకి · తెలుగు
- الغراب والجرة · العربية
- کلاغ و کوزه · فارسی
- 乌鸦喝水 · 中文