पुस्तकालय / Aesop’s Fables

चरवाहा और भेड़िया।

इनसे जुड़ी कहानी: Aesop

चरवाहा और भेड़िया।

एक चरवाहे ने एक बार एक भेड़िये के बच्चे को पाया और उसे पालने का फैसला किया। समय के साथ, उसने भेड़िये को पड़ोसी झुंडों से मेमने चुराना सिखाया। भेड़िया, जो जल्दी सीखने वाला साबित हुआ, अंततः चरवाहे की ओर मुड़ा और बोला, "चूंकि तुमने मुझे चोरी करना सिखाया है, तुम्हें सतर्क रहना चाहिए, नहीं तो तुम अपने ही झुंड के कुछ भेड़-बकरियों को खो दोगे।"

यह चेतावनी किसी के कार्यों के परिणामों की याद दिलाती है। चालाकी और शिकारी प्रवृत्ति के लिए जाने जाने वाले प्राणी को पालकर, चरवाहे ने अनजाने में अपने ही झुंड को खतरे में डाल दिया। भेड़िये पर मेमने की तरह व्यवहार करने का भरोसा करना अप्रत्याशित खतरों को जन्म दे सकता है।

सीख
कहानी का नैतिक यह है कि किसी को गलत करना सिखाना अंततः अपने ही पतन का कारण बन सकता है।

चर्चा के प्रश्न

  1. गड़रिये और भेड़िये के बीच के संबंध से हम क्या सीख सकते हैं?
  2. भेड़िये की चेतावनी अनैतिक व्यवहार के परिणामों को कैसे दर्शाती है?
  3. यह कहानी नैतिक शिक्षा वाली अन्य प्रसिद्ध कहानियों से कैसे जुड़ सकती है?

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दूसरी भाषा में पढ़ें

शुभ रात्रि।

कल रात: लोमड़ी और सारस।