
भूखा भेड़िया सुबह भोजन की तलाश में इधर-उधर घूम रहा था। जब वह जंगल में बने एक झोपड़ी के दरवाजे से गुजरा, तो उसने एक माँ को अपने बच्चे से कहते सुना, "चुप रहो, नहीं तो मैं तुम्हें खिड़की से बाहर फेंक दूंगी, और भेड़िया तुम्हें खा जाएगा।"
भेड़िया पूरे दिन दरवाजे पर इंतजार करता रहा। शाम को, उसने उसी औरत को अपने बच्चे को दुलारते हुए सुना, "अब तुम चुप हो, और अगर भेड़िया आएगा, तो हम उसे मार डालेंगे।" यह सुनकर, भेड़िया ठंड और भूख से हांफता हुआ घर चला गया।
जब वह अपनी मांद में पहुंचा, तो श्रीमती भेड़िया ने पूछा कि वह थका हुआ और बिना भोजन के क्यों लौटा है, जो उसकी सामान्य आदतों के विपरीत था। उसने उत्तर दिया, "क्यों, सच कहूं! मैंने एक औरत के शब्दों पर विश्वास कर लिया!"
कहानी का नैतिक यह है कि किसी को दूसरों के असंगत शब्दों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, खासकर जब वे इरादे के बजाय भावना से प्रेरित हों।
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कल रात: लोमड़ी और सारस।