
लोमड़ी और मच्छर।
इस छोटी और मधुर नैतिक कहानी में, एक लोमड़ी नदी पार करने के बाद अपनी पूंछ को झाड़ी में फंसा हुआ पाती है, जिससे मच्छरों का झुंड आकर्षित होता है जो उसके खून पर भोजन करते हैं। जब एक दयालु हेजहोग मच्छरों को भगाकर मदद करने की पेशकश करता है, तो लोमड़ी मना कर देती है, यह समझाते हुए कि मौजूदा मच्छर पहले से ही भरे हुए हैं, और नए मच्छरों को आमंत्रित करने से केवल बदतर स्थिति होगी। यह सार्थक कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी एक छोटी समस्या को सहन करना बेहतर होता है, बजाय एक बड़ी समस्या का जोखिम उठाने के।


