पाठ का क्रम
5 मिनट
रोचक शुरुआत
पूछें कि किस-किसने कभी कोई काम जल्दबाज़ी में किया और उसे दोबारा करना पड़ा। कुछ बच्चों से झटपट उदाहरण सुनें, फिर पूछें कि क्या सबसे तेज़ होने का मतलब हमेशा सबसे पहले पहुँचना होता है।
15 मिनट
कहानी वाचन
कहानी ज़ोर से पढ़कर सुनाएँ। जहाँ खरगोश लेटता है, वहाँ रुककर बच्चों से अनुमान लगवाएँ कि आगे क्या होगा। कहानी पूरी करें और घटनाओं को क्रम से दोहराएँ।
15 मिनट
विश्लेषण अभ्यास
जोड़ियों में बच्चे लिखें कि खरगोश ने क्या किया और कछुए ने क्या किया, फिर बताएँ कि किस फ़ैसले से दौड़ का नतीजा तय हुआ।
10 मिनट
जीवन से जुड़ाव/चिंतन
बच्चे किसी ऐसे काम के बारे में लिखें जिसमें वे लगे रहने से बेहतर हुए, भले ही प्रगति धीमी रही हो।
5 मिनट
मूल्यांकन
बच्चों से कहें कि वे कहानी की सीख अपने शब्दों में समझाएँ और कहानी का कोई एक पल बताएँ जो उसे सही साबित करता हो।
कहानी का परिचय
- शीर्षक और सीख: खरगोश और कछुआ - “धीरे चलो, पर चलते रहो, जीत तुम्हारी होगी।”
- कहानी का सार: डींग मारने वाला खरगोश धीमे कछुए से दौड़ लगाता है, बीच रास्ते में सो जाता है और जागकर देखता है कि कछुआ मंज़िल पार कर रहा है।
पाठ की मुख्य बातें
- सीखने के उद्देश्य:
- “पहले”, “फिर” और “अंत में” का प्रयोग करते हुए कहानी क्रम से सुनाना।
- कहानी की सीख पहचानना और उसे दिखाने वाली दो बातें ढूँढ़ना।
- खरगोश और कछुए के फ़ैसलों की तुलना करना।
- चर्चा के प्रश्न:
- दौड़ के बीच में खरगोश आराम करने क्यों रुक गया?
- कछुआ ऐसा क्या करता है जो खरगोश नहीं करता?
- कब जल्दबाज़ी के बजाय धीरे और ध्यान से काम करना बेहतर होता है?
- आवश्यक सामग्री:
- कहानी की प्रतियाँ
- बोर्ड और चॉक या मार्कर
- नोट्स और विचार लिखने के लिए काग़ज़
उत्तर कुंजी
1 C, 2 D, 3 A, 4 B