
भेड़ की खाल में भेड़िया
एक बार एक भेड़िये ने आसानी से भोजन प्राप्त करने के लिए अपना रूप बदलने का फैसला किया। उसने एक भेड़ की खाल पहनी और झुंड में मिल गया, जिससे उसने अपने चतुर वेश से चरवाहे को सफलतापूर्वक धोखा दिया।
जब रात हुई, तो चरवाहे ने दरवाजा बंद कर दिया और बाड़े के प्रवेश द्वार को सुरक्षित कर दिया, यह सोचकर कि सब कुछ ठीक है। हालांकि, रात के समय चरवाहा अगले दिन के लिए मांस लेने के लिए बाड़े में वापस आया। जल्दबाजी में, उसने गलती से एक भेड़ के बजाय भेड़िये को पकड़ लिया।
एक पल में, चरवाहे ने भेड़िये को मार डाला, यह सोचकर कि उसने भोजन प्राप्त कर लिया है। कहानी का सीधा सबक है: जो दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, वे अंततः खुद को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कहानी का नैतिक यह है कि छल-कपट अंततः अपने ही पतन का कारण बनता है।
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कल रात: लोमड़ी और सारस।